अपनो से अपनी बात
,,,,,,,,, विवाह दो परिवारों का मिलन ......
आज तक जब तक शादियों मे चली गई, उनमे से लगभग 70% लोगो ने खरीदा है- दुल्हन की शक्ल तक किसी ने नहीं देखा ... उनका नाम तक कोई नहीं जानता ... अक्सर तो शादी विवाहो मे मे जाने और वापस आना भी हो गई पर रखने तक नहीं आया और ना ही कभी देखने की कोशिश भी करी, कि स्टेज कहां सजा है, दोहरा कहां बैठा है .. शादी दो परिवारो का मिलन है जिसने इसे स्टेस सिंबल बना लिया है। हम सब कुछ समझते हैं हुऐ भी चुप रहते हैं। ।
भारत में लगभग हर शादी में हम 75% फालतू जनता को निमंत्रण देते हैं ... और कहते हैं कि सबसे खराब काम है
जो तुम्हारा ही नाम जानती है ...
जो केवल आपके घर की लोकेशन जानती है .. जो केवल आपकी पद-वापसी जानती है उसे घर से कोई रूचि नहीं है।और जो केवल एक ही के स्वादिष्ट और विविधता पूर्ण व्यंजनाओं का स्वाद लेने आता है ...
विवाह न सत्यनारायण भगवान की कथा नहीं है कि हर आते जाते राह चलते को रोक कर कर प्रसाद दिया जाए। केवल आपके रिश्तेदारों, कुछ बहुत करीबी दोस्तों के अलावा आपकी शादी मे किसी को कोई विचार नहीं होता है।
ताम झाम, पंडाल झालर, सैकेंड वाइल्ड, डीजेस्ट्रा डीजे, दहेज का मंहगा सामान एक संक्रामक बीमारी का इलाज करता है।
लोग आते हैं यह देख रहे हैं और "मै भी यही लक्षणस्थजम करूँगा, बल्कि इससे बेहतर होगा"।
और लोग करते हैं ... दिखावा करने में अपने जीवन भर की कमाई लुटा देते हैं .. लोन ले लेते हैं ..
उसकी किश्तें जीवन भरतीते है ...
आपके लाखों का ताम झाम उनकी आँखों में बस आधा घंटे के लिए गिर जाता है,
शादी मे दिखावे के लिऐ पकड पकड कर नाचना। शराब पीना कहना खुशी का मौका है सबकी
जबरदस्त मिलनी बनाना। खाने व बैठने के लिए दुर अलग जाना। कर्णबुज़ कर बारात लेट करना आजकल फैशन बन गया है
शादी खुशी का मौका है तो परिवार आपस मेअच्छे से मिले तो साथ मे साथ मिलकर आधा एक घंटा तो बिताये न कि निष्पक्षता से वह असली मिलनी है
समारोह मे विवाह के साक्षी बनने आये है तो सबके सामने विवाह हो ताकि लोग सिर्फ लिफाफा न दे आर्शीवाद भी दे।
शराब खराब है कुछ अच्छा नहीं होता है तो अच्छा समय मे शराब क्यो?
खाने मे ५० की जगह ५ चीजे बनवाये चके की स्वाद लगे।आइट ले प्लेट मे न जाऐ सुअर सुअर की सोच सोच खाना ले।
विवाह से भविष्य बनाना है बिगाडना नहीं बेकार की शो बाजी के चक्कर मे लिया गया कर्ज को चुकाने के कारण उनका भविष्य खराब हो गया है।]
इस अपसान और दिखावे को रोकना होगा ।।
आप सबको यह बाते पता है कोई नई बात नहीं लिखी जाएगी। हम सबकुछ जानकर भी बदलना नहीं चाहते, काश ऐसा हो जाऐ की कल्पना ही रहती है। कुछ लोगो मे बदलाव भी आया है। ये आज का घिनौना सच है और हम इसके हिस्से रहे हैं
हम सब को मिलकर प्रयास करना चाहिए।
कहानी अच्छी लगी तो कम ही सही ..


Neeraj patel
ReplyDeleteDob 01/01/2002
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